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Harivansh Rai Bachchan Kavita | राष्ट्रिय ध्वज

Harivansh Rai Bachchan Kavita | राष्ट्रिय ध्वज Harivansh Rai Bachchan Kavita नागाधिराज श्रृंग पर खडी हु‌ई, समुद्र की तरंग पर अडी हु‌ई, स्वदेश में जगह-जगह गडी हु‌ई, अटल ध्वजा हरी,सफेद केसरी!   न साम-दाम के समक्ष यह रुकी, न द्वन्द-भेद के समक्ष यह झुकी, सगर्व आस शत्रु-शीश पर ठुकी, निडर ध्वजा हरी, सफेद केसरी!   […]

Harivansh Rai Bachchan Poems | पतझड़ की शाम

Harivansh Rai Bachchan Poems | पतझड़ की शाम Harivansh Rai Bachchan Poems है यह पतझड़ की शाम, सखे !   नीलम-से पल्लव टूट ग‌ए, मरकत-से साथी छूट ग‌ए, अटके फिर भी दो पीत पात जीवन-डाली को थाम, सखे ! है यह पतझड़ की शाम, सखे !   लुक-छिप करके गानेवाली, मानव से शरमानेवाली कू-कू कर […]

Harivansh Rai Bachchan Kavita | राष्ट्रिय ध्वज

Harivansh Rai Bachchan Kavita | राष्ट्रिय ध्वज Harivansh Rai Bachchan Kavita नागाधिराज श्रृंग पर खडी हु‌ई, समुद्र की तरंग पर अडी हु‌ई, स्वदेश में जगह-जगह गडी हु‌ई, अटल ध्वजा हरी,सफेद केसरी!   न साम-दाम के समक्ष यह रुकी, न द्वन्द-भेद के समक्ष यह झुकी, सगर्व आस शत्रु-शीश पर ठुकी, निडर ध्वजा हरी, सफेद केसरी!   […]

Harivansh Rai Bachchan Kavita | पतझड़ की शाम

Harivansh Rai Bachchan Kavita | पतझड़ की शाम Harivansh Rai Bachchan Kavita है यह पतझड़ की शाम, सखे !   नीलम-से पल्लव टूट ग‌ए, मरकत-से साथी छूट ग‌ए, अटके फिर भी दो पीत पात जीवन-डाली को थाम, सखे ! है यह पतझड़ की शाम, सखे !   लुक-छिप करके गानेवाली, मानव से शरमानेवाली कू-कू कर […]

Harivansh Rai Bachchan Poems | चिडिया और चुरूंगुन

Harivansh Rai Bachchan Poems | चिडिया और चुरूंगुन Harivansh Rai Bachchan Poems छोड़ घोंसला बाहर आया, देखी डालें, देखे पात, और सुनी जो पत्‍ते हिलमिल, करते हैं आपस में बात;- माँ, क्‍या मुझको उड़ना आया? ‘नहीं, चुरूगुन, तू भरमाया’ डाली से डाली पर पहुँचा, देखी कलियाँ, देखे फूल, ऊपर उठकर फुनगी जानी, नीचे झूककर जाना […]

Harivansh Rai Bachchan Poems | आ रही रवि की सवारी

Harivansh Rai Bachchan Poems | आ रही रवि की सवारी Harivansh Rai Bachchan Poems आ रही रवि की सवारी। नव-किरण का रथ सजा है, कलि-कुसुम से पथ सजा है, बादलों-से अनुचरों ने स्‍वर्ण की पोशाक धारी। आ रही रवि की सवारी। विहग, बंदी और चारण, गा रही है कीर्ति-गायन, छोड़कर मैदान भागी, तारकों की फ़ौज […]

Harivansh Rai Bachchan Poems | लहर सागर का श्रृंगार नहीं

Harivansh Rai Bachchan Poems | लहर सागर का श्रृंगार नहीं Harivansh Rai Bachchan Poems लहर सागर का नहीं श्रृंगार, उसकी विकलता है; अनिल अम्बर का नहीं खिलवार उसकी विकलता है; विविध रूपों में हुआ साकार, रंगो में सुरंजित, मृत्तिका का यह नहीं संसार, उसकी विकलता है।   गन्ध कलिका का नहीं उदगार, उसकी विकलता है; […]

Harivansh Rai Bachchan Poems | गीत मेरे

Harivansh Rai Bachchan Poems | गीत मेरे Harivansh Rai Bachchan Poems गीत मेरे, देहरी का दीप-सा बन। एक दुनिया है हृदय में, मानता हूँ, वह घिरी तम से, इसे भी जानता हूँ, छा रहा है किंतु बाहर भी तिमिर-घन, गीत मेरे, देहरी का द‍ीप-सा बन। प्राण की लौ से तुझे जिस काल बारुँ, और अपने […]

Harivansh Rai Bachchan | साथी, साँझ लगी अब होने!

Harivansh Rai Bachchan | साथी, साँझ लगी अब होने! Harivansh Rai Bachchan फैलाया था जिन्हें गगन में, विस्तृत वसुधा के कण-कण में, उन किरणों के अस्ताचल पर पहुँच लगा है सूर्य सँजोने! साथी, साँझ लगी अब होने! खेल रही थी धूलि कणों में, लोट-लिपट गृह-तरु-चरणों में, वह छाया, देखो जाती है प्राची में अपने को […]

Harivansh Rai Bachchan Kavita | मेघदूत के प्रति

Harivansh Rai Bachchan Kavita | मेघदूत के प्रति महाकवि कालिदास के मेघदूत से साहित्यानुरागी संसार भलिभांति परिचित है, उसे पढ़ कर जो भावनाएँ ह्रदय में जाग्रत होती हैं, उन्हें ही मैंने निम्नलिखित कविता में पद्यबध्द किया है भक्त गंगा की धारा में खड़ा होता है और उसीके जल से अपनी अंजलि भरकर गंगा को समर्पित […]

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